भारत में ड्रोन की मदद से हो रही हथियार और ड्रग्स तस्करी लगातार एक बड़ी सुरक्षा चुनौती बनती जा रही है। ऐसे समय में Indrajal Ranger Anti-Drone Patrol Vehicle का आना सुरक्षा एजेंसियों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यह भारत का पहला वाहन है जो चलते हुए भी ड्रोन को पहचानने, ट्रैक करने और इंटरसेप्ट करने की क्षमता रखता है। इसकी उन्नत तकनीक, ऑटोनोमी और तीन-स्तरीय डिफेंस सिस्टम इसे आधुनिक सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप बनाते हैं।
Indrajal Ranger क्या है और क्यों है यह इतना खास?
Indrajal Ranger एक मोबाइल एंटी-ड्रोन पेट्रोल वाहन है जिसे हैदराबाद के एक स्टार्टअप ने विकसित किया है। यह उपकरण सीमा क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी हाई-सिक्योरिटी ज़ोन्स में भी तैनात किया जा सकता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 10 किलोमीटर दूर से ड्रोन का पता लगा सकता है और खतरे की स्थिति में अपने तीन स्तरों वाले डिफेंस सिस्टम से उसे रोक देता है।
वाहन की डिजाइनिंग को भारतीय इलाकों के हिसाब से खास तौर पर तैयार किया गया है, जिससे यह गांव की संकरी सड़कों से लेकर कठोर ऑफ-रोड बॉर्डर क्षेत्रों तक आसानी से चल सकता है।
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तीन-स्तरीय Anti-Drone Defense System: सुरक्षा का मजबूत कवच
Indrajal Ranger में ड्रोन को रोकने के लिए तीन चरणों में काम करने वाली सुरक्षा तकनीक मौजूद है, जिससे किसी भी ड्रोन खतरे को लगभग असंभव बना दिया जाता है।
1. Cyber Takeover (पहली लाइन ऑफ डिफेंस)
यह सिस्टम 4 किमी रेंज में दुश्मन ड्रोन को हैक करके अपने नियंत्रण में ले आता है और उसे वाहन के पास सुरक्षित उतार देता है।
- यह लगभग 60% ड्रोन पर प्रभावी होता है।
- तस्करी या निगरानी में इस्तेमाल ड्रोन को सबूत के रूप में बरामद किया जा सकता है।
- पूरी प्रक्रिया ऑटोनोमस है, यानी मानवीय हस्तक्षेप बेहद कम होता है।
2. Soft Kill Technology (दूसरी लाइन ऑफ डिफेंस)
यदि हैकिंग विफल हो जाए, तो यह सिस्टम नेविगेशन स्पूफिंग का उपयोग करता है और ड्रोन को रास्ते से भटका देता है, जिसके बाद वह खुद ही क्रैश हो जाता है।
- यह 2 किलोमीटर की रेंज में एक साथ कई ड्रोन को निष्क्रिय कर सकता है।
- भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में भी सुरक्षित तरीके से प्रयोग किया जा सकता है।
3. Interceptor Drone (तीसरी लाइन ऑफ डिफेंस)
यदि अन्य दोनों तकनीकें काम न करें, तो एक हाई-स्पीड इंटरसेप्टर ड्रोन हवा में भेजा जाता है।
- यह ड्रोन दुश्मन ड्रोन को एक-के-बाद-एक टक्कर दे कर रोक सकता है।
- रात के समय भी हाई-रिज़ॉल्यूशन टॉप-डाउन वीडियो उपलब्ध कराता है।
- इससे तस्करों के छिपाने या ड्रॉप पॉइंट की सटीक लोकेशन मिल जाती है।
चलते-चलते ड्रोन पकड़ने की क्षमता — तकनीक में अनोखा
Indrajal Ranger की सबसे अत्याधुनिक क्षमता यह है कि यह मोशन में रहते हुए भी ड्रोन ट्रैक और इंटरसेप्ट कर सकता है, जो दुनिया में बहुत दुर्लभ फीचर है।
- ड्रोन अक्सर 10 किमी दूर दिखते हैं, लेकिन उन्हें रोकने की क्षमता केवल 4 किमी के अंदर सक्रिय होती है।
- ऐसे में वाहन का चलते रहना जरूरी होता है ताकि वह इंटरसेप्शन पॉइंट तक पहुंच सके।
- सिस्टम पूरी तरह ऑटोमेटेड है, केवल एक “इमरजेंसी स्टॉप बटन” उपलब्ध है।
यह सुविधा भारतीय सीमा जैसी परिस्थितियों के लिए अत्यंत उपयोगी है, जहाँ ड्रोन लगातार लोकेशन बदलते रहते हैं।
कहाँ-कहाँ होगा इसका उपयोग? शहरी और सीमा दोनों के लिए आदर्श समाधान
Indrajal Ranger को सिर्फ बॉर्डर तक सीमित नहीं रखा गया है। इसे कई हाई-रिस्क और संवेदनशील इलाकों में भी तैनात किया जा सकता है।
बॉर्डर पेट्रोलिंग
- ड्रग्स और हथियार तस्करी
- पाकिस्तान/चीन की सीमा पर रिमोट ड्रॉपिंग गतिविधियाँ
- सीमा सुरक्षा में तत्काल प्रतिक्रिया क्षमता
शहरी सुरक्षा
- राजनीतिक रैलियां, धार्मिक आयोजन
- वीवीआईपी मूवमेंट
- CM/PM हाउस की सुरक्षा
- दूतावास एवं महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठान
- स्टेडियम और बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम
इंडस्ट्री और प्राइवेट सेक्टर
- तेल और गैस रिफाइनरी
- केमिकल फैक्ट्रियाँ
- डेटा सेंटर
- निजी सुरक्षा क्षेत्र
इसके संचालन के लिए गृह मंत्रालय (MHA) और ARDC की मंजूरी जरूरी है। मंजूरी मिलने के बाद इसे सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में खरीदा जा सकेगा।
Conclusion
Indrajal Ranger न सिर्फ भारत बल्कि विश्व के लिए एक अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन समाधान के रूप में उभर रहा है। इसकी मोबाइल क्षमता, तीन-स्तरीय सुरक्षा सिस्टम और ऑटोमेशन इसे आधुनिक सुरक्षा जरूरतों का सबसे उन्नत विकल्प बनाते हैं। ड्रोन खतरे लगातार बढ़ रहे हैं, और ऐसे में यह वाहन पुलिस, सेना, सुरक्षा एजेंसियों और औद्योगिक संस्थानों के लिए एक अनिवार्य तकनीक बनने जा रहा है।
यदि आप तकनीक, सुरक्षा और ड्रोन-रोधी सिस्टम से जुड़े अपडेट पढ़ते हैं, तो इस विषय पर जागरूकता और जानकारी बढ़ाना आज की जरूरत है।
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